जो चैन अमन का पाठ पढ़ाते उन्हीं पर हुई है गोलीबारियां कब तक, कब तक इनसे यूं पेश आओगे क्या कभी कोई सख्ती भी अपनाओगे समझाओं अब इनको इन्हीं की भाषा में दोस्ती, भाईचारा कब तक अपनाओगे ये दरिंदे यूं ही छलनी करते रहेंगे सीना हमारे जवानों का या फिर उन निहत्थे निर्दोष इंसानों का और कब तक, कब तक कड़ी निंदा जताओगे इनको इन्हीं की भाषा में कब समझाओगे