आजकल अपनो से,दूसरो के यहाँ मुलाकात होती है ! किसी से गले मिल जाना ,और किसी से चन्द बात होती है !! पता न कौन से रिश्ते निभाये जाते हैं ! जहाँ चादर छोटी ,और चौड़ी खाट होती है !! बैठ जाते हैं सब मिलकर ,होंठो पे लाफ होती है ! एक -दूजे के हालात जानने की ,झूँठी सवालात होती है !! क्यो कि खंजर है सबके दिलो में ,नीचा दिखाने का ! उसका मकान ऊँचा बना कैसे ,इसपे बात होती है!! अपने वो नहीं होते ,जो दें साथ मय्यत में ! अपनत्व खुद निखर आता ,जब लगी हो जाँ हिफाजत में !! क्यो अब हर तर्क की नहीं ,कोई बाप होती है ! आजकल अपनो से ,दूसरो के यहाँ मुलाकात होती है !!