कुछ बाते कहने सुनने की
दिल में यूँही आ जाती हैं
लड़ती हूँ मैं तनहाईयों से बहुत
मगर वो फिर भी जीत जाती हैं
कहती मैं किसी से नहीं
कहती हूँ अपने आप से
सोचती हूँ जब भी कभी
आ जाती हैं कुछ यादे
दबे पॉव चुप चाप से
और एक अनकही कहानी
बनकर रह जाती हैं
हर बात कहने की नहीं
कुछ बस महसूस की जाती हैं
खामोशियों से टकरा कर
आवाज़ गूँज कर रह जाती है
चाँद पर किसी का हक़ नहीं
चाँदनी सबके हिस्से में आती है
लड़ती हूँ मैं तनहाईयों से बहुत
मगर वो फिर भी जीत जाती हैं।।
-अनुजा
