जाने वाले यूं अक्सर रूठा नहीं करते
यूं खरोच से पत्थर टूटा नहीं करते
खामोशियां भी बोलती है जनाब
सिर्फ आवाज़ों से ही दिल हिला नहीं करते
माना फासला सच से कुछ इस क़दर है
रास्ते फिर भी अपनी मंज़िल भूला नहीं करते
चलो तुमको भी आजमा लेंगे वक़्त के साथ
जो बने रेत के होते है
हथेली पर रुका नहीं करते।।
© अनुजा


