मेरे सपने रंगीन तो कभी बेमाने है,

फिर भी आँखों के किनारों से कोई छोर ढूंढता हु,

कभी दिल को छू जाए वो सन्नाटे

कभी महफ़िलो का शोर ढूंढता हु।

दुर फलक तक जाए जो वो सुरूर ढूंढता हु

मैं तो हु बंजारा इन अमीरो के शहर में

मैं तो मौसमी शामो की ओढ़ ढूंढता हु।

मेरे सपने कभी रंगीन कभी बेमाने है

मैं तो तुम में अपने जैसा कोई और ढूंढता हु।