मत पूछ मुझसे की कौन हूँ में
ढूँढता फिरे जिसे तू मंज़िल मंज़िल
तेरे दिल में छिपा वो मोन हूँ मैं
तेरे ख़्वाबों के नक़्श से
मिलते मेरे भी अन्दाज़ है
तू बन कि हवा बह जाए
रुक जाऊँ साँसों के ज्वार में
तेरे दिल में छुपा वो जुनून हूँ मैं
पाया खोया सब रह गया
वक़्त बरसा टूट के बह गया
जो बुझा ना आँधी के ज़ोर से
तेरे दिल में जलती वो लौ हूँ मैं
मत पूछ मुझसे कौन हूँ मैं??
- अनुजा
