जो लिखे ही नहीं कभी उन ख़तों के जवाब तो आए


 उलझे से ही सही मेरे लिए कुछ सवाल तो आए


यूँही बीते जा रही थी ज़िन्दगी ख़ामोश सी


दबे पाँव बातो के तूफ़ान तो आए


साहिल से टकराए कश्ती तो पार हो


समंदर में उतरने का मुक़ाम तो आए


ख़ामोशियाँ ही बेहतर है कह देती है हर हाल अक्सर


तेरी मेरी किसी ख़ामोशी की शाम तो आए

- अनुजा