बाते और तन्हाई कुछ बाते कहने सुनने की दिल में यु ही आ जाती है लड़ता हु में तन्हाईयो से मगर वो फिर भी जीत जाती है.. कहता में किसी को नहीं कहता हु अपने आप से सोचता हु जब भी कभी आ जाती है कुछ यादे दबे पाँव चुप चाप से और एक अनकही कहानी बन कर रह जाती है!! हर बात कहने की नहीं कुछ बस महसूस की जाती है खामोशियो से टकराकर आवाज़ कहा गूंज पाती है चाँद पर किसी का हक नहीं चांदनी मेरे भी हिस्से में आती है लड़ता हु में तन्हाईयो से मगर वो फिर भी जीत जाती है..