जीवन के अपने अब तक के विविध अनुभवों से मैं इस निष्कर्ष पर पहुंचा हूं कि हमारा विद्यार्थी जीवन अपने कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और लॉ-चैंबरों से निकलने के बाद आरंभ होता है।वहां इसमें यह अपेक्षा की जाती है कि हम अपने पढ़ाई के विषयों को ज्ञान की कुंजी मानकर और उनसे अंतरंग भाव से जुड़कर अध्ययन करें ।बाद के जीवन में ही हमें बहुत सी चीजें सीखने होती हैl तथाकथित विद्यार्थी जीवन असली विद्यार्थी जीवन के लिए महज एक तैयारी होती है l

विद्यार्थियों को शिक्षा के क्षेत्र मे लड़ना ,सामाजिक कार्य संलग्न रहने वाले का साथ हमने जरूर दिया हो, पर राजनीतिक हड़ताल हो या प्रदर्शनों में उनके भाग लेने का समर्थन मैं नहीं कर सकता l वे चाहे किसी भी राजनीतिक दल के प्रति खुले तौर पर सहानुभूति प्रकट करते हो l

लेकिन मेरी राय में अपने अध्ययन काल में उन्हें किसी भी राजनीतिक आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लेने की स्वतंत्रता नहीं होनी चाहिए l विद्यार्थी राजनीतिक में सक्रिय भाग लें और साथ-साथ अपना अध्ययन भी जारी रखें, यह नहीं हो सकता।


विद्यार्थी जीवन त्याग और तपस्या सभी समस्याओं से लड़ते हुए आगे बढ़ना संयम सीखने के लिए है जो भी विद्यार्थी भोग विलास में पड़ जाते हैं वे अपना जीवन बर्बाद कर देते हैं l