एक दीप प्रकृति के नाम
मैं दीप अवश्य जालाऊँगा
एक दीप हरियाली का तो एक मानवता के निशानी का
एक दीप आशा का तो एक विश्वास का
एक तम में उजाले का तो एक भूखे के निवाले का
एक दीप बेसहारे के सहारे का तो एक डूबते किनारे का
एक दीप क्षण-जन के वाणी का तो एक मानव के नादानी का
स्नेह प्रेम मानवता मैं लाऊंगा l
हां मैं दीप आवश्यक जालाऊँगा l
~अनुज


