अरसे बाद अपने गॉव कि तरफ,

एक बार फिर लौट आया हूँ मै,

फिर वही खेतो की हरियालियो के बीच,

अंकुरित गेहुँओ कि बालियो में, सरसों के फूलों कि तरह

एक बार फिर लौट आया हूँ मैं,

गॉव कि छोटी सड़को पर,

दौड़ते साइकिलो कि रफ्तारो मे,

चौराहे के नुक्कड़ पर खड़े होकर,

दोस्तों संग गप्पे करने ,

मॉ के आँचल में खुद को समेटने,

फिर लौट आया हूँ मैं,

मुझे पता है अल्प हैं मेरी यात्रा,

जाना मुझे फिर वही हैं

जहां न चौराहे का नुक्कड़ होगा

न हरियाली भरे खेत,

न ही मॉ का आँचल होगा,

लेकिन फिर खुद को तलासने

वापस वही ,

एक बार फिर लौट जाऊंगा मैं