साँसों ने मजदूरी की

कमाया एक पल

पल-पल को जोड़कर

जमा करी दो-घड़ी

और वह भी आज

कोई लूट कर ले गया...


सोचता हूँ

रिपोर्ट लिखवा दूँ

लेकिन कहाँ...?

अब इस शहर में लुटेरे बहुत है...।

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अनुज खर्ब