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स्त्री के सपने


पीहर से ससुराल के बीचकैद हो जाते हैंन जाने कितनेस्त्री के सपने

वह कैदी बन जीती हैऔरों के सपनेहर रोज़

आज एक नादान सपनाबंधनों में होकर भीघूम रहा है ज़मीन परउड़ने की कोशिश मेंशायद आज़ाद हो जाये वह...।

— अनुज खर्ब/@AnujKharb2
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