पीहर से ससुराल के बीचकैद हो जाते हैंन जाने कितनेस्त्री के सपनेवह कैदी बन जीती हैऔरों के सपनेहर रोज़आज एक नादान सपनाबंधनों में होकर भीघूम रहा है ज़मीन परउड़ने की कोशिश मेंशायद आज़ाद हो जाये वह...।
पीहर से ससुराल के बीचकैद हो जाते हैंन जाने कितनेस्त्री के सपने
वह कैदी बन जीती हैऔरों के सपनेहर रोज़
आज एक नादान सपनाबंधनों में होकर भीघूम रहा है ज़मीन परउड़ने की कोशिश मेंशायद आज़ाद हो जाये वह...।