रात की चुनरी सेगायब हुये हैं सितारेंज़मीन से कोईकोतवाल आया हैदेखों!चांद भी डरकर आजघटाओं के पीछेछुपा बैठा है...।
रात की चुनरी सेगायब हुये हैं सितारें
ज़मीन से कोईकोतवाल आया है
देखों!चांद भी डरकर आजघटाओं के पीछेछुपा बैठा है...।