रात की चुनरी से
गायब हुये हैं सितारें
ज़मीन से कोई
कोतवाल आया है
देखों!
चांद भी डरकर आज
घटाओं के पीछे
छुपा बैठा है...।
~अनुज खर्ब/@AnujKharb2


रात की चुनरी से
गायब हुये हैं सितारें
ज़मीन से कोई
कोतवाल आया है
देखों!
चांद भी डरकर आज
घटाओं के पीछे
छुपा बैठा है...।
~अनुज खर्ब/@AnujKharb2