तुम रेत
मैं हवा
आ फिर उड़ चले
किसी चट्टान पर
इस ढलती शाम में
समुंदर की लहरों के बीच
एक-दूसरे में खो जाने के लिये...।
~अनुज खर्ब


तुम रेत
मैं हवा
आ फिर उड़ चले
किसी चट्टान पर
इस ढलती शाम में
समुंदर की लहरों के बीच
एक-दूसरे में खो जाने के लिये...।
~अनुज खर्ब