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प्रेम किश्त 2


क्यों ढूँढता है रोज़-रोज़इश्क़ को मृग बनकर

वह तो मुश्क (कस्तूरी) हैहर पल तृष्णा ही पायेगा...।

_________अनुज खर्ब

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