क्यों ढूँढता है रोज़-रोज़इश्क़ को मृग बनकरवह तो मुश्क (कस्तूरी) हैहर पल तृष्णा ही पायेगा...।_________अनुज खर्ब
क्यों ढूँढता है रोज़-रोज़इश्क़ को मृग बनकर
वह तो मुश्क (कस्तूरी) हैहर पल तृष्णा ही पायेगा...।
_________अनुज खर्ब