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परिवर्तन


सूखी है डालीरोम-रोम प्यासा धरती कातप्त आकाशगुमसुम है नदियाश्वास भी है उतप्तहृदय में विस्फोट होने को हैऐ प्राणी अब तो संभल जापरिवर्तन होने ही वाला है।

अनुज खर्ब

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