मेरे पड़ोस में

फिर उग आया है झाड़

बिना सीचें भी

सीना तान के खड़ा हो जाता है वह।


हरबार उसकी निर्मम हत्या होती है

फिर भी वह ढीठ

न जाने कहाँ से

उठ खड़ा होता है।


उसको जड़ से उखाड़ देते है लोग

उसमें बचता नहीं है कुछ शेष

और वह फिर एक बार तन्न जाता है।


जितना भी मारो

कितना भी काटो

ज़ुल्म कर लो

उसको किसी का भय नहीं

वह तो बस उगना जानता है

उसको तो आना है

जीने के लिये...।

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अनुज खर्ब