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महफ़िल


महफ़िल में वो आयेमुस्कुराये

फिर गले लगकरधीरे से फुसफुसाते हुये बोले

ये दुनिया का रस्मों-रिवाज है हुज़ूरइश्क़ न समझ लेना...।

_________अनुज खर्ब

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