उड़ने का ख़्वाब लेकर,आसमान को निहारता हूँ हर रोज़,शायद उसका मन बदल जाएलेकिन हर बार पैर ज़मीन पर ही पाता हूँ...।_________अनुज खर्ब
उड़ने का ख़्वाब लेकर,आसमान को निहारता हूँ हर रोज़,
शायद उसका मन बदल जाएलेकिन हर बार पैर ज़मीन पर ही पाता हूँ...।
_________अनुज खर्ब