प्रेम ने

समाज की कंक्रीट पर

किया है अतिक्रमण।


लीप दिया हैं

उन

पथरीले रास्तों को।


बनाया है

आंगन मिट्टी का।


अब वहां

पौध लगी है

मानवता की।


जिन पर अब

जीवन की

ओस ठहरती है...।


~अनुज खर्ब/@AnujKharb2