फिर एक बार तेरी लौ से जल जाना चाहता हूँ

ऐ हया! थोड़ी देर और ठहर   

अँधेरा होने को है...

अँधेरे में मैं, तू और मेरा अक्स एक हो जायेंगे

जो कल तक तेरी कैद में ख़ामोश थे,

आज वो पंछी आज़ादी के लिए

हृदय के पिंजड़े से फुर्र हो जायेंगे।

आकाश भी अब बाहें फैलाकर 

उनको रोक न पायेगा,

तू देख! आज दिल 

तूफानों को भी पार कर जायेगा।

जो आये हैं बरसों से भुलावा देकर

वो भी आज नाविक न बन पायेगा

आज हर एक दिल में तुझे अज्ञेय(प्रेम) नज़र आएगा...।

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अनुज खर्ब