कल रातचौखट के बाहरमर्यादा और संयम खड़े थेमैंने दरवाज़ा नहीं खोला,और जब आँखे खुलीतो उनकी हत्या हो चुकी थी...।___________अनुज खर्ब
कल रातचौखट के बाहर
मर्यादा और संयम खड़े थेमैंने दरवाज़ा नहीं खोला,
और जब आँखे खुलीतो उनकी हत्या हो चुकी थी...।
___________अनुज खर्ब