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गेंदा


तुम्हारी छत परगुलाब खिला है आजजो तुम्हारी मुस्कान काकारण बना है।

उसके इर्द-गिर्ददेखना कभीरोज़ गेंदा खिलता है।

वह मैं हूँअनथक प्रयासरतकिन्तुउपेक्षितफिर भीसहज रूप मेंसुलभ हूँ मैं...।

— अनुज खर्ब/@AnujKharb2
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