तुम्हारी छत परगुलाब खिला है आजजो तुम्हारी मुस्कान काकारण बना है।उसके इर्द-गिर्ददेखना कभीरोज़ गेंदा खिलता है।वह मैं हूँअनथक प्रयासरतकिन्तुउपेक्षितफिर भीसहज रूप मेंसुलभ हूँ मैं...।
तुम्हारी छत परगुलाब खिला है आजजो तुम्हारी मुस्कान काकारण बना है।
उसके इर्द-गिर्ददेखना कभीरोज़ गेंदा खिलता है।
वह मैं हूँअनथक प्रयासरतकिन्तुउपेक्षितफिर भीसहज रूप मेंसुलभ हूँ मैं...।