जब रिश्तों के विश्वास में
आपके कई राज़ लिये
वह हृदय में अडिग रहे।
जब आपकी हर केंद्रित
मुसीबत को
परिधि से दूर करने लगे।
जब एक-दूजे में
मेरा-तेरा मिटने लगे
जब सुख-दुख में कोई
अपना-अपना सा लगने लगे।
तब अधिकार में भी
हक़ नज़र आता है
वह व्यक्ति नहीं
दोस्त बन जाता है...।
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अनुज खर्ब


