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दिल


दिल ढूँढता हैकुछ अनकहे किस्सेजो दबी ज़ुबान में भीखुद से न कहे गये हों..

दिल ढूँढता हैबेनाम ख़तजिन्हें आज भीकिसी का इंतज़ार है..

दिल ढूँढता हैफिर तुम्हेंअजनबी की तरह...।_________अनुज खर्ब

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