
रोड़ी बदरी पर बैठे बच्चे
देख रहे थे
ईंट ढोते हुये पिता का
लाल हो जाना।
हर पसीने की बूंद पर
तोड़ रहे थे
अपने सपनों का बेलदार हो जाना।
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रोड़ी बदरी पर बैठे बच्चे
देख रहे थे
ईंट ढोते हुये पिता का
लाल हो जाना।
हर पसीने की बूंद पर
तोड़ रहे थे
अपने सपनों का बेलदार हो जाना।