भूख उसका नाम है

जो पहले आपको बेचैन करती है

फिर पेट को अपनी ओर खींचती हुई

आंतड़ियों से पानी सोख लेती है

जब कमजोर पड़ता शरीर

नींद के पर काट देता है

तो कुछ समय पश्चात

दिन-रात का अंतर शून्य में गुम जाता है

धीरे-धीरे आपके सपने छीन लेता है

तब मन के ख़्वाब चलना नही चाहते

क्योंकि पाँव जमीन में धस चुके होते है

बोझ की तरह ये शरीर

सिकुड़ जाता है

तब ये तुम्हारे सही-गलत सब धरे रह जाते है...।

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अनुज खर्ब