भूख
दावानल बन जाती है
जब
गरीबी में
बाढ़ आती है।
हर बहाव से
कटता है किनारा
और सिस्टम दूर खड़ा
नजर आता है।
देखता है वह
हर बरस
चार बरस पिछड़ जाता है।
पानी में
सड़ते हुये अंग
जब धीरे-धीरे गलते है
तो शहर से कोई चित्रकार
काली स्याही से
उनको रंगने आता है।
दूर खड़ा
जीवन कहीं
नदी में ही ठहर जाता है।
लौटता हुआ पानी
जब घटता है
तो पीछे
अवशेष छोड़ जाता है।
इन अवशेषों पर
अब वह फिर से
खड़ा करेगा जीवन
क्योंकि
यही तो उसकी
अब तक की
जमा पूंजी है
जो उसने
बाढ़ में बनाई है...।
_________
अनुज खर्ब


