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बरसात


तेरी इक बरसात मेंडूब जाता हूँ मैंजब-जब तू निकलती है इस शहर मेंमेरी सांसे थम जाती है...।

अनुज खर्ब

नोट :- दिल्ली की सड़के और बरसात का इश्क़जाम लगा देता है कमबख़्त..

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