मन बड़ा बेईमान है

आज आलोचक बना हुआ है

तेरी यादों को भी लाइन में लगाये

हिसाब मांगे सामने खड़ा है


तेरी सभी विशेषताओं का

लेखा-जोखा लिये है

और तेरी हर व्याख्या को

अपना आदर्श मान लेता है


हर आकलन पर आनन्दित हो उठता है

जिसे तुम्हारे यथार्थ रूप में देखना असम्भव है

उसे मन ही में देख लेना चाहता है।


तेरी हर बात को स्वीकार लेता है

उसका विश्लेषण(छानबीन) किये बिना,

अपने व्यक्तिगत तत्व को छोड़कर

तुझ पर ही ध्यान केंद्रित रखता है


मन आज प्रेरक और मार्गदर्शक है

तेरे सम्मान को अपना उत्तरदायित्व मान बैठा है

सहृदयता के साथ, बिना गुण-दोषों के

तेरे विकास को ही अपना ध्येय मान लेता है


मन बड़ा बेईमान है

आज आलोचक बना हुआ है...।


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अनुज खर्ब