जानते हो वो कौन है जिसके आगे सब मौन है
ममता की मूरत है जिसकी प्यारी सूरत है
उसको चीला कर भी बाद में पचताते है
उसको देखे बिना बहुत घबराते है
जो छुप छुप कर रोती है उसको देखो तो हस देती है
भगवान से भी उची हैं पर झूठ बोलने में थोड़ी सी कच्ची है
किसी और का गुस्सा उसपे निकलतें है
उसको देखे बिना बहुत घबराते है
सुबह रोज उठाती नही उठो तो नाश्ता नही दूंगी धमखती है
बात बात पे टोकती हैं रात को बाहर जाने से रोकती है
उसके गुस्से से चाहे बहुत डरते है
मगर उसको देखे बिना बहुत घबराते है
उसका होना ही बहुत है बनाता वो मुझे मजबूत है
उसी का सहारा है वो ही मेरी डूबती नाव का किनारा है
बचपन में सब चीज़े बताते थे अब क्यों सब चीज़े छुपाते है
पर आज भी उसको देखे बिना बहुत घबराते है


