जो हमसे जल नहीं पाया उसे दफना दिया हमने इश्क़ की रूह नाजायज़ कब्र-ए-दिल में रोती है जब इश्क़ की बातों में है दुनिया हसीं इतनी फिर ये इश्क़ करने पर तबाही क्यों बरपती है? दुआ हमको विरासत में मिली थी अम्मी-अब्बू से या थी वो बद्दुआ - 'तुझको कभी ना इश्क़ छू पाये!' मेरे इस दर्द गहरे पर हँसो मत ओ निरे ज़ालिम जो आँखें खूब हँसती हैं, वे अश्क़ों से झगड़ती हैं न जाने क्या थे हम दुनिया हमें अब क्या समझती है हमारा दिल जो क्या खोया हमें पत्थर समझती है हमसे पूँछ बैठा अजनबी पत्थर पहाड़ी पर "भरा क्या तेरे दिल में है मेरे दिल में तो पानी है" क्या वो समझे है वो बेजान, ईंधन है भरा दिल में रोज़ यादों की चिंगारी यहाँ विस्फ़ोट करती है बहुत नज़दीक से देखी है हमने वह क़यामत जो किसी की डोली उठने पर किसी के दिल में ढहती है