राते....'s image
Share0 Bookmarks 64624 Reads3 Likes

अनगिनित रातों के अंधेरे

एक सुबह की ख़्वाब में

करवट ले रही है।

रात कट के रात ही आ रही है

खालीपन में 

कोई इंतजार ठहर रही है।

टिमटिमाते तारों में,

चांदनी उजालों

के चांद से जज़्बात

मेरे साथ जग रहे हैं।

पुकार रही है हवाएं, 

मुझसे टकरा कर मुझे 

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts