मेरा मुझ पे कोई जोर चलता नहीं
अब मुझे तुम अपनी हिरासत में रख लो
पी रही हूं जहर हर दिन एक नई
डर जिन्दगी से लगने लगा है हमें
अब मुझे तुम अपनी हिफाजत में रख लो
मंजिलें मेरी दूर दूर, दिखता नहीं कुछ
अंधेरों से घबराने लगी हिम्मते
अब मुझे तुम अपनी उजालों में रख लो।
किधर जाऊ बंद है रास्ते सारे
ठोकरों से टूटने लगे हैं हर कदम
अब मुझे तुम अपनी चौखट पे रख लो।
सहारा नहीं कुछ,किनारा नहीं कोई
कस्ती उम्मीदों की डूबने लगी है मेरी
अब मुझे तुम अपनी दरिया में रख लो।
किसी ने हाल समझा नहीं मेरा
छुप ना पाए कोई दर्द मेरी तुमसे
अब मुझे तुम अपनी नज़रों में रख लो

