एक दिन तुम जीतोगे

और वो जीत मेरी भी जीत होगी।

तुम आभार व्यक्त नहीं करना

और न ही मुझे कुछ कहना

मैं बस खुले आसमान की ओर देखूंगी

देखूंगी उसके नीले रंग को जो तुम्हारे जीत के रंग

देखने के इंतजार में मैंने नहीं देखा।

अपने सांसों के अंदर के उन "झूमती"हवाओ को

महसूस करना चाहूंगी,जो तुम्हारे जीत के इंतजार में

सिर्फ मुझे जीवन देने के लिए "चल" रहे थे।

मैं नदियों की अब"उनकी" गीत सुनना चाहूंगी

जो मेरे मन के लहरों में तुम्हारे जीत के ही गीत गाए थे।

उन ऊंची ऊंची पहाड़ियो में खुद को पुकारूंगी

अपनी आवाज जो सदियों से नहीं सुना उसे सुनूंगी।

और फिर मैं अपने आंखो के अंदर देखूंगी

देखूंगी वो गजल ,वो शाम,वो उदासियां

अब कैसी दिखती हैं

तुम्हारे जीत के बाद.......