थोड़ा तुम मज़बूत हो जाओ
थोड़ा हम मज़बूत हो जाय...
चलो एक दूसरे के विरुद्ध खड़े हो जाएं
एक छोर तुम थामे रखना एक छोर मैं
दूरियां रहे भी तो
एक दूसरे से बंध जाएं...
प्रेम तो कम भी हो जाता है
और खत्म भी, हम बिना प्रेम के भी
सांस और धड़कन की तरह जुड़ जाएं.....
जीवन धूप की तरह है और धूप ही रहेगी
चलो एक दूसरे के लिए वृक्ष बन जाएं...

