हुई तैयार फिर वानर सेना , पहुंची सागर तट 

समुद्र देव न देवैं मार्ग, करैं रघुवर से हठ 


क्रोधित हो तब रघुवर तानै समुद्र देव पर बाण 

प्रकट हुए, की क्षमा याचना, संकट में थे प्राण

 

प्रभु प्रकोप शांत हुआ, बचै समुद्रदेव के प्राण  

श्रीराम सेतु का नल-नील, करन लगै निर्माण

 

 वस्तु पर जिस लिख दिया प्रेम से प्रभु का नाम

डूबने कैसे दें उसे स्वयं पालनहार भगवान्


नल नील श्रीराम जय लिख ड़ालें जब चट्टान   

सागर तल पर तेरैं पत्थर बनै सेतु महान

- अंशुमान