मनुष्य के हृदय में लोटते साँपों ने
उस के अंतः मन को फिर टटोला
और थोड़ा हिसहिसाते हुए
विशधरो ने अपना भेद खोला
कहा हमने ग़ैर क़ानूनी प्रहार अब कर दिया है बंद
कानूनी तरीके से मनुष्य को डसने का अब हो गया प्रबंध
आधुनिक अभिव्यक्ति की आज़ादी ने खोला नया द्वार
और अपना संपूर्ण विश हमने तुम्हारे शब्दों में है दिया उतार
अब मनुष्य स्वयं ही मनुष्य को डसेगा
अपने शब्दों और वाणी के विषबाण कसेगा
युगो से है लगाया हम पर डसने का आरोप
अब मनुष्य स्वयं भुगतेगा अपना ही प्रकोप
-अंशुमान


