मसरूफ़ियतमसरूफ़ियों की लततन्हाइयों में दब गयीजब से जिंदगी, येघरों में सिमट गयीज़रूरते, खामखाँ कीसब दूर हो गयींज़िन्दग,कुछ इस कदरमज़बूर हो गयीरिश्ते, कुछ इन दिनोंपर मज़बूत हो गएलोग अपने ही घरों मेंजब मसरूफ़ हो गए-अंशुमानी
मसरूफ़ियत
मसरूफ़ियों की लततन्हाइयों में दब गयीजब से जिंदगी, येघरों में सिमट गयी
ज़रूरते, खामखाँ कीसब दूर हो गयींज़िन्दग,कुछ इस कदरमज़बूर हो गयी
रिश्ते, कुछ इन दिनोंपर मज़बूत हो गएलोग अपने ही घरों मेंजब मसरूफ़ हो गए
-अंशुमान
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