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रुस्वाई


मेरे दिलरुबा ये चालाकी ठीक नहीं हैइश्क़ कर गैरों से नज़रे मिलाना ठीक नहीं

मिलकर सुलझा लेतें है उलझनों के किस्सेअब रोज रोज की रूस्वाई ठीक नहीं है

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