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माँ


धैर्य की पराकाष्ठा की रूप है वोउलझनों में अनकही सी शब्द है वो,

झुर्रियों पे स्नेहिल मुस्कान है वोममता की प्रतिमूर्ति मेरी माँ है वो।

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