वो शख्स हँसता है मस्कुराता है
पर दिल का दर्द उसकी आँखों में नज़र आता है …।

ज़िन्दगी गर होती एक किताब की तरह होती
पढ़ लेते बुक मार्क लगा कर
सबसे पसंदीदा पन्ना
जब जी करता

तुम्हारे चहरे की ख़ुशी दिल का सुकून चाहता हूँ
ना जाने क्यों तुम्हें इतना टूटकर चाहता हूँ …

समय की कड़ी धूप में
तुम्हारे साथ के कुछ पल
छाया से लगे मुझे

सोचा था अब ना सोचेंगे तुम्हे
यही सोच कर मूँद ली आँखे
और वहा भी खुद को पाया
तुम्हे सोचते हुए

सिर्फ दिल रखने का हुनर होता है वरना
कोई शख्स किसी के लिए जरुरी नहीं होता

आज भी ये सिर झुका सजदे में उस खुदा के
आज भी बंद पलकों में तेरी सूरत नज़र आई
अब इबादत किसकी करू सोचता हूँ ,
तेरी चाहत की इबादत मेरे खुदा की रुसवाई है .