पानी की बूँद सा वज़ूद
जीवन नदियां में बहता जाता
संसार सागर की लहर बन
हर दिन बड़े पत्थरों से टकराता
धीमें बहाव में वाष्पित हो
बादलों में जा समा जाता
बारिश की सुहानी फ़ुहार बन
सूखी रेत में खुशबू बन महक जाता
कभी पहाड़ों से झरना बन गिर
कायनात को ख़ूबसूरत कर जाता
नन्ही सी बूँद ही तो हूँ
जीवन की समाप्ति पर
याद बन किसी की आँखों में समा जाता
फिर से सृष्टि बीज रूप हो
उसी एक बूंद रूप को पा जाता


