आँखों में आँसू कहाँ ठहरते है
मुस्कुराहट होठों पर ठहरी है कभी ?
यादों के लम्हें भी तो चलते रहते है ज़हन में
क्या अहसासों की चाल धीमी होती है कभी ?
सफ़र में कहाँ ठहरते है ये बादल
ये पेड़ ये धरती आसमान
न दिन रुकता है ना रात ठहरती है
न सपनों का रेला रुकता है कही ?
न बादलों में बूँद ठहरती है
न समंदर की लहर रुकती है
न रुकती है वो बहती हुई नदी
जज़्बात भी उफ़ान लिए ठहरे है कभी ?
धूप भी दिन के साथ चलती है
चाँद का आकार भी हर दिन नए रूप लेता है
हवा का झोंका भी तो हर दिन सफ़र करता है
मुझ से तुम तक
अहसासों की खशबू लिए.....
बोलो ज़िन्दगी कहाँ ठहराव पाती है