हम कलयुग की औलादें हैं
और कलयुग का धर्म निभाना
हमारा परम दायित्व है
हम अपना धर्म निभाएंगे
क्योंकि हम सभ्य समाज से हैं!
चाहे कोई दरिंदा किसी स्त्री के कपड़े
फाड़ ही क्यों ना डाले
कोई किसीको सर - ए - आम जान से
मार ही क्यों ना डाले
हम अपने किवाड़ लगा लेंगे
अपना रास्ता बदल देंगे
ये अत्याचार होते हुए हम देंखेगे भी नहीं
क्योंकि हम सभ्य समाज से हैं!
किसी कोने में दबा
अपनी आखिरी सांसें लेता
रत्ती भर ज़मीर है
हम उसे भी नहीं छोड़ेंगे
उसका भी बेरहमी से गला घोट
हम सी लेंगे अपने होंठ
जब तक स्वयं हमें नंगा नहीं किया जाएगा
हमारी गर्दन पर चाकू नहीं आएगा
हम नहीं बोलेंगे
बिल्कुल नहीं बोलेंगे
चुप रहेंगे
बिल्कुल चुप!
हम किसी के व्यक्तिगत
मामले में नहीं बोलते
क्योंकि हम सभ्य समाज से हैं!
फिर भी गर उनकी चीखें
हमारे कानों में खून निकाल देंगी
तो हम उसे भी पोंछ लेंगे
अपने सफेद कुर्ते में
कोई मरता है तो मेरे
लेकिन हमारा सफेद कुर्ता मैला नहीं होना
उसपर खून के छींटे तक आने नहीं देंगे
क्योंकि हम सभ्य समाज से हैं!
लेकिन जब कोई स्त्री करेगी बगावत
अपनी देह बेचकर
पालेगी अपने बच्चों को
और नहीं मरने देगी उन्हें भूखा पेट
तो हमारी छाती पर सर्प
लोटने लगेंगे
अचानक से हमारी मूक
पड़ी जबानें कैंची से भी तेज
चलने लगेंगी
हमारा मरा हुआ ज़मीर अचानक से
जीवित हो उठेगा
और हम नकार देंगे उन स्त्रियों को
अपने समाज का हिस्सा मानने से
क्योंकि हम सभ्य समाज से हैं!
हम एक पल के लिए भी
आपको ये भ्रम नहीं होने देंगे कि
इंसानियत अभी भी ज़िंदा है
और ये कलयुग नहीं
हम आपको सच्चाई से अवगत करवाते रहेंगे
क्योंकि हम सभ्य समाज से हैं
हर दिन
हर पहर
हर घंटे
हर सेकंड
कोई ना कोई दिल दहलाने वाली खबर
हम आप तक पहुंचाते रहेंगे!
मरते दम तक
कलयुग के अंत तक
हम ये साबित करते रहेंगे
कि भाईसाब!
ये कलयुग ही है
घोर कलयुग!
और हम कलयुग के सभ्य समाज का हिस्सा!
~अंशिका शुक्ला
(@anshi_ka_aaghaaz)


