वो चिड़ियां जिसे चहकना सिखाया था तुमने

उसकी आवाज सुनने को तरसते हैं दरख़्त

वो डालियां जो हंसती थी उसकी शैतानियों पर

आजकल एक झलक के लिए राह तकती है

वो आसमान जो परेशान था उसकी उडारियों

से तलबगार हैं उसके पंखों का

वो कोयल खामोश है एक अरसे से

जिसे मिले थे सुर कभी तेरे मेरे इश्क से

वो चिड़ियां जिसे तू आजाद कर के गया था

वो कैद है यादों की वीरानियो में