रात भर किताबो के साथ जागते रहे

सुबह उसके साथ बातो में मशग़ूल रहे 

जनाब जाते जाते खुद को मेरी आदत बता गए

मेरी आंखों की नींद को मुझ पर हंसना सीखा गए

हमने एक इश्क ऐसा भी किया

वो वक्त गुजारने के लिए मोहब्बत करते रहे

 हम वक्त निकालने के लिए मशक्कत करते रहे