मेराआलना
तोड़ के कही और तुने ठिकाना बनाया था
जब आया ठोकर खाकर इल्जाम तो दूर की बात तेरा महल सजाया था
हर बार आंख बन्द कर के तेरा किरदार साफ़ बनाया था
हर बार तेरे फरेब ने आकर सब वहम बताया था
ना तेरा किरदार बदला ना तेरा दोखा
हुआ तो बस इतना हुआ


तोड़ के कही और तुने ठिकाना बनाया था
जब आया ठोकर खाकर इल्जाम तो दूर की बात तेरा महल सजाया था
हर बार आंख बन्द कर के तेरा किरदार साफ़ बनाया था
हर बार तेरे फरेब ने आकर सब वहम बताया था
ना तेरा किरदार बदला ना तेरा दोखा
हुआ तो बस इतना हुआ