धैर्य मे वो सीता सी सब सुख त्याग 

धर्म से लड़े 

अधर्म के खिलाफ वो द्रोपदी सी रक्त से उसकी जट्टा धुले

प्रेम मे वो सती सी देह त्याग अग्नि मे जले आत्मा शिव के नाम करे

भक्ति मे वो मीरा सी अडिग हो वैराग्य पर डटे

सक्ती मे वो चण्डीका सी दानव भी डर के दूर हटे 

स्त्री के है रूप असंख्य अब तू सोच किसको तू पुकारे